मुस्कुराई तब मैंने दाएं हाथ का अंगूठा और तर्जनी ऊँगली को मिलकर ज़ीरो का सिंबाल बनाया और इसारा किया तो फिर से मुस्कुराई और अंदर कमरे में चली गई ! मैं फ्रेस होकर नीचे आया और लिविंग रूम में बैठकर टीवी देखने लगा तो भाभी ने जगनुआ के औरत हाथ से चाय भिजवाया, जब ओ चाय लेकर आई और जाने लगी तो धीरे से पूछा ''आपका नाम तो बता दो भौजी'' तो कुछ बोली और सिर्फ मुस्कुरा कर चली गई ! क्या मोहक मुस्कान है , पहली बार इतने नजदीक से मुस्कुराते हुए देखा ! एक बार उसे फिर देखने के लिए भाभी को आवाज दिया ''भाभी जी बिस्कुट दे दीजिये'' भाभी फिर से उसके हाथ से बिस्कुट भिजवाया तो ओ आई तो फिर से नाम पूछा तो धीरे से बोली ''श्यामकली'' और जाने लगी तो मैंने बोला रुको न प्लीज़ तो रुक गई और मेरी तरफ देखने लगी तब मैंने फिर से धीरे से कहा ''मैं आपको श्यामा कहूँ तो अच्छा लगेगा '' तो कुछ नही बोली बस हलके से मुस्कुराई चली गई ! मैं टीवी देख रहा था तो जगनुआ करीब साढ़े 8 बजे मेरे पास आया और बोला ''लल्ला सरकार मैं 9 बजे वाली बस से गाँव जाऊंगा'' तब मैंने कहा ''जगनू दादा मैं भी गाँव जाऊंगा तो मेरे साथ ही चल देना,बस में कहाँ धक्का खिलाओगे बीमार भौजी को'' तो बोला ''कब, तक जाओगे लल्ला सरकार'' तब कहा ''बस नहा धो लूँ नास्ता कर लूँ फिर चलते है'' ! तब जगनुआ बोला ''ठीक लल्ला सरकार'' कहकर चला गया ! मैं जगनुआ से उम्र में छोटा हूँ इस लिए उसे दादा कहता हूँ, मेरी उम्र 40 साल है पर दिन भर आराम से एयर कंडीस्नर दूकान में बैठता हूँ, खान पान अच्छा है इस लिए उम्र कम ही लगती है ! गोरा रंग,ऊँचा, मजबूत कद, भरे हुए लाल लाल गाल किसी भी महिला को जल्दी ही आकर्षित कर लेता हूँ ! करीब 10 बजे गाँव के लिए निकल लिए ! पीछे की सीट पर बैठी हुई श्यामा घुघट निकाल कर बैठी थी बार बार छोटी से टॉवेल से हवा हॉक रही थी तो मैंने बोला ''लगता है भौजी को गर्मी लग रही है'' इतना कहकर श्यामा की तरफ काच थोड़ा नीचे उतार दिया तो हवा झोके में घुघट बाहर गया और पूरा सिर खुल गया तो श्यामा फिर से जल्दी से सिर पर साड़ी डालकर घुघट निकाल लिया पर जैसे ही हाथ छोड़ा फिर से साड़ी उड़ गई और घुघट खुल गया तो फिर साड़ी से सिर ढकने लगी तो जगनू गाँव की भाषा में बोला '' लल्ला सरकार तेरे देवर लगते है,जेठ नहीं,'' और हँसने लगा तो श्यामा कुछ नहीं बोली और सर खोलकर आराम से बैठ गई ! वाह वाह क्या बला की खूबसूरत लगती है श्यामा ! मैं बार बार श्यामा को काच में देखता, कई बार श्यामा की नजर मेरे से टकराई श्यामा नजर नीचे कर लेती ! हवा में उसके बाल बार बार गालो पर टकराते तो ओ बार बार बाल को हटाती तब मैंने काच बंद किया और AC चला दिया ! गाँव के बारे में बात करते करते आराम से कार चलाते हुए चल रहा था ! पर अभी तक श्यामा की आवाज नहीं सूना मैंने चुपचाप दोनों की बातें सुनती रही ! गावँ पहुचने के पहले छोटी से बाजार है जब वहां पहुचा तो जगनू बोला ''लल्ला सरकार यहां रोक दीजिये कुछ मिठाई ले लूँ हेमंत लिए'' तब मैंने पूछा ''हेमंत लड़का आपका'' तो बोला ''हां सरकार ये लेकर आई है,अब ओ अपना ही बेटवा है'' ! मैंने कार रोक दिया तो जगनुआ उतर गया और श्यामा को भी चलने के लिए बोला तो श्यामा ने मना कर दिया ! तो गजनुआ चला गया, जैसे ही जगनुआ गया मैंने श्यामा से पूछा '' भाभी जी नास्ता में क्या खाओगी'' तो कुछ बोली , बल्कि न में सिर हिला दिया तब मैं हस्ते हुए बोला ''ई गजनुआ दादा कमाल करते है,गूँगी मेहरारू ले आये'' तो श्याम धीरे से ''मैं गूंगी नहीं हूँ कुँवर जी'' उसने मुझे कुंवर बोला मुझे बहुत अच्छा लगा मैंने फिर से नास्ते के लिए पूछा ''क्या खाओगी भाभी'' तो बोली ''आपको जो अच्छा लगता है ले आइये खा लुंगी'' तब मैं कार से उतरा पास होटल से से 4 समोसा और आधा किलो ठंडी जलेबी ले आया और श्यामा के हाथ में पकड़ा दिया और श्यामा को बोला '' लो भाभी मेरी पसंद तो यही है'' तो उसने सीट पर नास्ता रख दिया तो मैंने उठा लिया की कहीं सीट पर जलेबी सीरा ! फिर मैं आगे ड्राइविंग सीट पर बैठ गया और पॉलीथिन खोल कर दे दिया तो फिर से खाने से मना कर दिया मैंने प्यार से बोला ''आपको मेरी कसम है नास्ता करिये, सुबह से चाय पीकर बैठी हो'' तो मेरी तरफ देखी और समोसा निकालकर मुझे दिया बोली ''कुंवर जी पहले आप लीजिये'' तो मैंने उसके हाथ से समोसा ले लिया व् खाने लगा तो श्यामा ने जलेबी निकाला व् मुझे दिया मैंने ले लिया और बोला '' आप भी खाओ न भोजी'' तो श्यामा सर्माते हुए मुह खोला और खाने लगी, मुश्किल से दो तीन बार खाने बाद सी सी करने लगी तो मैंने पूछा ''तीखा है क्या'' तो हां में गर्दन हिलाया तो मैंने जलेबी को आगे बढ़ाया और बोला मुँह खोलिये तो मना करने लगी जब मैंने दो तीन बार प्लीज़ प्लीज़ किया तो सर्माते हुए मुह खोल दिया तो जलेबी मुह में डाल दिया तो खा लिया और बोली ''आप मिर्ची ज्यादा खाते कुंवर जी'' तब मैंने बताया की ''नही,आप वाला समोसा ज्यादा चरखा है, लाइए देखूं तो सही'' तो अपना समोसा मेरी तरफ बढ़ा दिया तो मैं उसका जूठा समोसा खाने लगा तो घबरा कर बोली ''कुंवर जी ये क्या किया आपने, मेरा जूठा समोसा खा लिया,लाइए मुझे वापस करिये'' तब मैंने मना कर दिया ! इतने में मेरी नजर दूर से आते हुए जगनुआ पर पड़ी तो मैं पानी पिया और मेरा समोसा कार के आगे डेस्क बोर्ड पर रखा और पानी की बोतल श्यामा को पकड़ाया और कार से नीचे उतर कर पास की गुमटी में चला गया और सिगरट जला कर पीने लगा ! मैं इस लिए हट गया की कहीं जगनुआ ये सब देख न ले ! जब जगनऊआ कार के पास पहुँचा तो मैं वापस आया और कार में जाकर बैठ गया और उससे पूछा ''क्या लाये दादा'' तो जगनुआ एक पाँव मिठाई और एक पाँव (दो सेवफ़ल) सेवफल दिखाया तो मैंने जगनुआ को 1000 की नोट दिया और बोला ''दादा मेरे लिए भी 3 किलो मिठाई और 4 किलो सेवफल, 5 दर्जन केला ले आओ'' तो जगनुआ वापस चला गया तो श्यामा बोली ''आप का समोसा मुझे दीजिये'' तो मैंने दे दिया तो तुरंत खाने लगी तो मैंने मना किया तो बोली ''आप मेरा जूठा खा सकते है तो मैं क्यों नहीं खा सकती हूँ आपका जूठा समोसा'' और जल्दी जल्दी पूरा समोसा खा गई और मेरी तरफ जलेबी बढ़ाया और बोली ''मुह फ़ाड़िये'' तब मैंने मुह फैला दिया तो श्यामा ने मेरे मुह में जलेबी डाल दिया तो उसका हाथ पकड़ कर जलेबी खा लिया और उसके हाथ को चूम लिया तो हाथ को जल्दी से खींचा और बोली ''अरे हाथ छोड़िये कोई देख लेगा'' तब मैंने हाथ छोड़ दिया ! और पानी की बोतल माँगा तो उसने दे दिया तो मैंने पानी पीकर वापस वापस उसे बोतल पकड़ा दिया ! श्याम से पूछा ''कहाँ तक पढ़ी हो भाभी'' तो बोली 10 वी पास हूँ 12 फेल हूँ'' कुछ देर तक बातें करता रहा और जगनुआ आ गया तो चल दिए करीब 30 मिनट में करीब साढ़े 11 बजे गाँव पहुच गए और घर में घुसने पहले कार रोक दिया तो दोनों उतरने लगे तो 3 किलो मिठाई और 4 किलो सेवफल, 5 दर्जन केलादे दिया और बोला मेरी तरफ से हेमंत को दे देना, पहले तो न नुकुर किया फिर लेकर चला गया ! करीब 1 बजे घर की छत पर चढ़ा तो देखा की श्यामा एक बाल्टी और अपने कपडे लेकर घर से बाहर निकली और मेरे घर की तरफ आने लगी मैं समझ गया ये मेरे यहां पानी की टंकी के पास बने बाथरूम में नहाने आ रही है ! श्यामा जब बाथरूम में घुस गई तो मैंने नीचे उतरा और बाथरूम पास पहुचा तो श्यामा कपडे धो रही थी मैं पास गया तो चौक गई पर कुछ नहीं बोली तब मैंने धीरे बोला '' भाभी बाजरे के खेत की तरफ आओ बात करनी है आपसे'' तो बोली ''नहीं कुंवर जी कोई देख लेगा तो मैं मुसीबत में फॅस जाउंगी, बड़ी मुश्किल से रहने का ठिकाना मिला है'' तब मैंने कहा ''अरे कोई नहीं देखेगा, मैं पहले चला जाता हूँ, बाद में आप लोटा लेकर आ जाइयेगा'' इतना बोलकर बिना जबाब सुने मैं बाजरे की खेत की तरफ चला गया ! बाथरूम के सामने बड़ा सा बगीचा है उसके बाद बाजरे के बहुत खेत है ! कई किलोमीटर तक सिर्फ ज्वार और बाजरा का घना जंगल टाइप है !
मैं बाजरे के घने खेतों में घुस गया और श्यामा का इन्तजार करने लगा करीब 15 मिनट बाद श्यामा हाथ में लोटा लिए आते दिखाई दी ! ओ आकर दूसरे खेत की तरफ चली गई मैं उसके पीछे पीछे पहुच गया तो मुझे देखकर खेत में घुस गई, मैं भी उसके पास पहुच गया ! (बाजरे के पेड़ इतने बड़े बड़े है की कोई अंदर है दिखाई नहीं देता) ! जैसे ही मैं पहुँचा तो बोली ''क्या बात करनी है,जल्दी करिये, ज्यादा टाइम लगा तो ओ पूछने लगेंगे'' तब मैं आगे बढ़ा और श्याम को पकड़ कर उसके गाल को चूम लिया तो जरा सा भी बिरोध नहीं किया और मुस्कुराते हुए बोली ''यही बात करनी थी, अब मैं जाऊं'' तो मैंने श्याम कसकर पकड़ा और सीने से चिपकाते हुए कई बार चुम लिया और चूची को दबा दिया तो श्यामा अपना दायाँ हाथ उठाया और मेरे कंधे के नीचे डालकर लिपट गई तो मैं ताबड़तोड़ श्यामा को चूमने लगा, चूचियों को दबाने लगा तो बोली ''अब जाने दो कुँवर'' और मेरे से अलग हो गई और बोली ''आप दूर से निकलिए कोई सक नहीं करें'' तब मैंने कहा ''बैठो न, बहुत सी बात करनी है'' तो बोली ''अभी जाने दीजिये, जब ओ घर नहीं रहेगे तब खूब देर तक आपसे बात करुँगी'' और जाने लगी तो तो एक बार फिर से उसे सीने से चिपका लिया और होठो को जोर से चूस लिया छोड़ दिया ! जब फिर से जाने लगी तो उसे हजार-हजार की 5 नोट देने लगा तो लेने से मना कर दिया तब मैंने जबरजस्ती उसके ब्रा के अंदर डाल दिया बार फिर से चूमते हुए चूची दिया तो बोली ''अब बस भी करिये,जाने दो न प्लीज़'' तो मैंने बोला ''ओके जाओ,आप बहुत सुन्दर हो भाभी जी'' तो कुछ नहीं बोली, मुस्कुराई और लोटे का पानी जमीन में गिराकर चली गई ! मैं दुसरी तरफ से खेत की मेड से चलकर रोड में आ गया ! मैं करीब 10 मिनट बाद वापस आया तो श्यामा जा चुकी थी ! टंकी के पास बने बाथरूम का घर में कोई उपयोग नहीं करता इस लिए ओ बहुत गंदा रहता है, उसी बाथरूम में श्यामा रोज नहाने आती है, इसलिए बाथरूम को बढ़िया साफ़ कर दिया, दरबाजा टूटा हुआ है, बढ़ाई को बुलाकर दरवाजा बदलवा दिया ! पानी की टंकी में काई लग गई थी, मजदुर से पानी की टंकी साफ़ करवाकर दुसरा पानी भरवा दिया ! साम को छत पर चढ़ा तो श्यामा दिखी तो एक छोटा सा कंकड़ मार कर उसे इसारा किया तो मेरी तरफ देखि और मुस्कुराई तो मैंने इसारा करके बुलाया तो कुछ देर बाद श्यामा एक बाल्टी लेकर आई और टंकी से पानी भरने लगी तो उसके पास गया तो बोली ''अपने बाथरूम साफ़ करवाया '' तो मैंने हाँ कहा और पूछा ''आपको कैसे पता चला'' तो बोली ''मैं आपके घर माठा (छाछ) लेने आई थी तब देखा'' तो फिर से बोली ''क्यों साफ करवाया, यहां तो आपके घर का कोई नहीं आता'' तो मैंने बोला ''आप नहाने आती हो न, और इस गंदे वाथरूम में नहाती थी,दरवाजा टूटा हुआ था , आपको नहाते कोई देख न ले ये सब मुझे अच्छा नहीं लगा'' ! तो बड़े प्यार से बोली ''आप बहुत नेक दिल इंसान हो कुंवर जी'' ! (जगनू दो भाई है और कुआ जगनू के बड़े भाई के हिस्से में है, उसने दरवाजा दुसरी तरफ कर लिया इस लिए श्यामा को पानी लाने में चक्कर काट कर जाना पड़ता था इस लिए ओ मेरे घर के पानी की टंकी के पास नहाने आती है) इतने में घर के गेट खुलने की अबाज आई तो मैं वहां से बगीचे में चला गया ! पेड़ की ओलट से देखा बड़े भाई है, बड़े भाई श्यामा से बात करने लगे जो मुझे सुनाई दे रही थे, बड़े भाई ने जगनुआ को बुलाने की बात कही ! श्यामा चली गई और कुछ देर बाद जगनुआ आया तो मैं भी भाई के पास आ गया ! भाई ने जगनुआ को कल बोलेरो लेकर बिंध्याचल चलने के लिए बोला ! भाई किराए से भी गाडी चलाते है और ज्यादातर जगनुआ ही लेकर जाता है ! जगनुआ के जाने के बाद मैंने भाई से पूछा '' बिंध्याचल जा रहे है दादा'' तो भाई बोले ''हां,कई दिन से तुम्हारी भाभी और माँ कह रही है, तू भी चलेगा'' तो मैंने काम के बाहने मना कर दिया,तो भाई बोले ''ठीक है'' मैं समझ गया बिंध्याचल जाने के बाद उसी दिन वापस आना सम्भव नहीं ! मैं मन ही मन श्यामा की चुदाई का प्लानिंग बनाने लगा ! क्योकि घर में कोई नहीं रहेगा ! मेरी पत्नी शहर में है और भाई,भाभी,माँ चले जायेंगे ! अगले दिन सुबह 9 बजे घर के सभी चले गए ! मैं तुरंत छत पर चढ़ा तो श्यामा दिखी तो कंकड़ मार कर इसारा किया तो 15 मिनट बाद बाल्टी लेकर आई ! और वाथरूम में घुस गई, मैं भी बाहर निकला और सोचा जाकर मिलु तो घर का नोकर जो भैसो को चारा, भूसा देता है ओ बाहर ही खड़ा था तो श्यामा के पास नहीं गया, सोचा कही ये सक न करे, श्यामा कुछ देर तक इन्तजार किया और वाथरूम से बाहर आई तो देखा की मैं नोकर के साथ खड़ा बातें कर रहा था ओ समझ गई और चली गई ! श्यामा मोबाइल भी नहीं है की उसे फोन करके बुलाऊँ ! करीब 10 बजे नॉकर दूर नदी किनारे वाले खेत में घास लेने चला गया तो फिर से छत पर चढ़ा पर श्यामा नहीं दिखी तो एक पत्थर लिया और श्यामा के खपरैल में फेंक दिया फिर भी श्यामा नहीं निकली तो मन बहुत खिन्न हुआ, शायमा के पास मोबाइल नहीं होने की कमी बहुत अखरी ! करीब 10:30 बजे फिर छत पर चढ़ा और फिर से एक पत्थर फेका तो श्यामा बाहर निकली तो इसारा किया तो ओ आई और बाथरूम में घुस गई मैं भी गया तो बाहे फैला दिया तो श्यामा आकर लिपट गई ! खूब चूमा और चूची दबाया, ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर चूची दबाने लगा तो महसूस किया कि श्यामा की चूचियों की निप्पल टाइट पड़ गई है, मतलब श्यामा चुदाई मूड बना लिया है ! मैंने श्यामा को बोला ''चलो बाजरे के खेत में'' तो बोली ''कोई आ गया तो'' मैंने बोला ''कोई नहीं आएगी'' तो कुछ नहीं बोली मैं मौन सहमति समझा और बोला ''मैं जा रहा हूँ आ जाना'' तो कुछ नहीं बोली बस मेरी तरफ देखती रही, मैं बाथरूम से बाहर गया और घने,खूब ऊँचे बाजरे के खेत की मेड पर जाकर खड़ा हो गया ! 5 मिनट बाद ही श्यामा भी गई और दोनों खेत के बीच में घुस गए ! आते ही श्यामा मेरे से लिपट गई और चूमने लगी, तो मैं
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| श्यामा की चूचियां १००% ऐसी ही है,जरा सा भी ढीली हुई है |
खेत में बैठ गया, ओ भी बैठ गई और मेरे गोरे-गोर लाल टमाटर जैसे चिकने गालो को जल्दी जल्दी चूमने लगी ! मैं भी उसे चूमने लगा, चूमते चूमते ब्लाउज और ब्रा का हुक खोल दिया और ब्लाउज उतारने लगा तो मना कर दिया और कान में धीरे से बोली ''कपडे मत उतारिये कुंवर'' मैंने बोला क्यों ? तो बोली ''कोई आ गया तो पहनने में टेम ज्यादा लग जाएगा'' मैंने बोला ''ठीक है'' ! जैसे ही ब्रा और ब्लाउज को खिसकाया श्यामा मस्त मस्त गोलाई लिए हुए चूचियां दिखी, श्यामा की चूची जरा सा भी ढीली नहीं हुई है एकदम से मस्त टाइट है ! चूचियों को सहलाने लगा तो श्यामा बोली ''जल्दी से कर लो कोई आ न जाए'' तब मैंने श्यामा की साडी और पेटीकोट को कमर तक खिसकाया तो देखा की श्यामा ने पेंटी नहीं पहने थी, चूत बड़े बड़े घने बालो से ढकी हुई है ! मैंने झुककर चूत चाटने लगा तो तो अपने हाथ को बढ़ाया और मेरे लण्ड को टटोलने लगी तब मैंने जल्दी से लोवर,चढ्ढी उतार दिया तो श्यामा लण्ड को पकड़ कर चूत में घुसेड़ने लगी पर बाल अधिक होने से लण्ड घुस नहीं रहा था तब मैंने जांघो के फैलाया और चूत पर चूककर चूत को गीली किया और एक ही झटके में करीब साढ़े सात इंच लंबा और खूब मोटा लण्ड पेल दिया, जैसे ही लण्ड घुसा की श्यामा की हल्की से चीख निकल गई और ओ जल्दी से उठकर बैठ गई और चूत को हाथ से ढक लिया, उसकी आँखों में आँसू आ गए तब मैंने पूछा '' दर्द हुआ क्या'' तो हाँ में गर्दन हिलाया मैं दोनों घुटनो के बल स्यामा के सामने खड़ा था,मेरा मोटा लण्ड फनफना कर खड़ा था जिसे श्यामा एकटक देखे जा रही थी ! तब मैंने श्यामा का चेहरा अपनी तरफ किया आसुओं को चाट लिया तो मुझे प्यार से किस कर लिया तो मैं झुककर उसकी चूची को चूसने लगा तो श्यामा एक हाथ से मेरे लण्ड को पकड़कर खिलाने लगी और बोली ''जल्दी कर लो नहीं तो कोई आ जाएगा'' तब मैंने कहा ''रहने दो तुम्हे दर्द हो रहा है'' तो बोली ''दर्द तो होगा, आपका कितना लम्बा मोटा है'' और लेट गई तब मैंने फिर से ढेर सारा थूक दिया और चूत को खूब गीली कर लिया और धीरे धीरे लण्ड को पूरा डाल दिया, श्यामा को दर्द नहीं हुआ ! लण्ड डालकर उसके ऊपर लेट गया तो फिर धीरे से कान में बोलती है ''जल्दी जल्दी कर लो यार कोई आ गया तो लफड़ा हो जाएगा'' तब मैंने फटाफट चोदने लगा, मुश्किल से 50-60 बार लण्ड को आगे पीछे किया और झर गया, श्यामा स्खलित नहीं हुई बल्कि जब मैं स्खलित हो गया तब श्यामा अपने चूतड़ को बार बार ऊपर उठा रही थी मतलब ओ स्खलित नहीं हुई ! मैंने उससे पूछा ''मजा नहीं आया न'' तो कुछ नहीं बोली और उठकर बैठ गई और चूत से बहते हुए वीर्य को पोछने लगी और फिर बैठे बैठे ही ब्रा का हुक लगा लिया और ब्लाउज पहनकर खड़ी हो गई और जाने लगी तो मैंने बोला ''एक काम करोगी क्या'' तो बोली ''जी कहिये'' तब मैंने कहा ''आज रात में आ जाओ न मेरे घर'' तो बोली ''पागल हो क्या,सभी रहेगे तो कैसे आ सकती हूँ'' तो मैंने बताया ''आज कोई नहीं है जानती हो न सभी विन्ध्यांचल गए हुए है'' तो बोली ''ओ तो बोल रहे थे की आज ही वापस आ जाऊंगा'' तब मैंने उसे बताया ''आज नहीं कल साम तक वापस आएंगे'' तो कुछ नहीं बोली और जाने लगी तब मैंने फिर से बोला ''आओगी क्या'' तो बोली ''देखती हूँ'' और चली गई मैं दुसरी तरफ से सड़क तरफ निकल गया और घूमते हुए 10 मिनट में घर आ गया ! तो देखा की श्यामा अभी भी बाथरूम में नहा रही है ! पर मैं उसके पास नहीं गया कुछ देर में ओ निकली और मेरी तरफ तिरक्षी नजर से देखि और चली गई ! साम को 4 बजे श्यामा फिर आई और बाजरे के खेत तरफ हसिया लेकर चली गई, मैं समझ गया भैस के लिए चारा काटने गई है, मैं भी पीछे पीछे चला गया और दोनों बाजरे के खेत के अंदर घुस गए और बातें करने लगे ! मैंने उससे पूछा ''आओगी आज रात में '' तो बोली हेमंत को छोड़कर कैसे आउ ,कही ओ रात में जाग गया और मुझे नहीं पायेगा तो सोर करेगा'' तब मैंने कहा ''अच्छा ठीक है मैं आ जाऊं तुम्हारे घर'' तो बोली ''आ जाइये'' तब मैंने कहा ''कितने बजे तक आ जाऊं'' तो बोली ''दस-साढ़े दस तक आ जाइयेगा'' तब मैंने कहा ''ठीक है आ जाऊंगा दरवाजा खोल कर रखना'' तो हां सर हिला दिया बोली ''अब जाइये कोई आ नहीं जाए'' तब मैंने उसके पास से चला आया और भाई साहब की बुलेट उठाया और पास ही गाँव में बाजार चला गया और 4 विगोरा 100 और 4 विगोरा फ़ोर्स की टेबलेट और कोहिनूर कंडोम ले आया ! और रात के 10 बजने का इन्तजार करने लगा ! साम को 7 बजे एक विगोरा फ़ोर्स की टेबलेट खा लिया और रात के 9 बजे फिर विगोरा 100 के एक टेबलेट खा लिया ! ये टेबलेट खाकर अपनी पत्नी की चुदाई कई बार कर चुका हूँ ! अच्छा खासा लण्ड खड़ा होता है और चुदाई का समय भी खूब बढ़ जाता है ! नॉकर से गेट की चाबी ले लिया और रात के करीब 10 बजकर 15 मिनट पर चुपचाप श्यामा के घर पहुँच गया ! दरवाजा खुला था मैं जैसे ही दरवाजा खोला श्यामा आ गई और अपने कमरे में ले गई ! श्यामा का कच्चे मकना में उसका कमरा सबसे किनारे एक कोने में था, जिसमे एक तखत 4 बाई 6 का बिछा था !
मैंने श्यामा से धीरे से पूछा ''हेमंत कहाँ सोया है'' तो दूसरे किनारे एक कमरे की तरफ इसारा किया ! और अपने कमरे का दरबाजा बंद कर लिया तो मैं ![]() |
| बल्ब के उजाले में श्यामा से लिपट कर सेल्फी लिया |
उठाने लगी समझ गया मेरे शरीर के बजन से उसे दिक्कत हो रही है तब मैंने अपने दोनों हाथ श्यामा के कंधे के बगल में रखा, श्यामा ने अपनी दोनों टांगो को उठाकर मेरी कमर पर रख लिया तो लण्ड की ठोकर मारने लग, ओ कुछ ही ठोकर खाने के बाद चूत को सिकोड़ लिया लण्ड खूब टाइट था, चूत भी टाइट हो गई तो तो उसे चुदाई में खूब मजा आने लगा ओ मुँह को सिकोड़ कर उ उ उ उ उ उ उ आ आहः आह आह आह उउउ सी सी सी की आवाज निकलने लगी और अपनी जीभ को बाहर निकालकर मेरी तरफ इसारा किया तो उसकी जीभ को चूसने लगा ओ भी मेरी जीभ को चूसने लगी ! मैं उसे तड़पाने के लिए लण्ड के ठोकर की स्पीड कम कर देता तो ओ अपनी दोनों टांगो को मेरी कमर पर रखकर अपने चूतड़ो को उठाकर लण्ड की तरफ झटका देने लगी बार बार चूतड़ो को उठाती और फिर बिस्तर पर पटकती फिर भी मैंने स्पीड नहीं बढ़ाया तो अपने दोनों हाथो को कमर पर रख कर लण्ड को आगे पीछे करने का इसारा करती और जोर जोर से मुझे चूमने लगी और बड़बड़ाते हुए कहने लगी ''अब और मत तड़पाओ कुँवर जल्दी जल्दी करो नहीं तो जान निकल जाएगी'' तब मैंने लण्ड के ठोकर की स्पीड बढ़ा दिया ! लण्ड चूत में खूब टाइट होकर फक्क फक्क करते हुए आगे पीछे हो रहा था लगातार 10 मिनट तक श्यामा को चोदता रहा और अचानक श्यामा की पकड़ मेरे से कम हो गई उसने अपने दोनों हाथों को बगल में रख दिया , टांगों को कमर से हटा दिया और लंबी लंबी साँसे लेने लगी, मैं समझ गया ओ झर चुकी है पर मैंने लण्ड का सूपड़ा नंगा किये बिना ही कंडोम चढ़ा लिया था ऊपर मेरे लण्ड पर विगोरा फ़ोर्स और विगोरा 100 का इतना ज्यादा असर था की मैं स्खलित नहीं हुआ ! श्यामा के स्खलित होने के बाद भी मैं लण्ड घुसेड़े हुए उसके ऊपर लेटा रहा तो कुछ देर में बोली ''आप का नहीं निकला क्या'' तो मैंने न
में गर्दन हिला दिया तो बोली ''कर लो न'' तब मैंने कहा ''अब मेरा नसा ऐसे नहीं उतरेगा'' तो बोली ''फिर कैसे उतरेगा'' तो मैंने कहा ''उठो और घोड़ी जैसे घुटनो के बल खड़ी हो जाओ'' तो ओ तुरंत घोड़ी बन गई मैं दोनों पाँव पर खड़ा हो गया और लण्ड पेल दिया और जोर जोर से चोदने लगा,लगातार 8 मिनट तक चोड़ता रहा पर सूपड़ा नंगा नहीं होने के कारण लण्ड पर घर्षण नहीं हो रहा था इस लिए मैं स्खलित नहीं हुआ और श्यामा थक कर पेट की तरफ से लेट गई,मैं लण्ड डाले हुए उसके ऊपर लेट गया तो धीरे से बोली ''क्या हुआ कुंवर,अभी तक नहीं निकला क्या'' तब मैंने कहा ''अब तो टोपी बाहर निकाल कर करूँगा तभी निकलेगा'' तो बोली ''ठीक है निकाल दो'' तब मैंने कंडोम बाहर किया और फिर से घोड़ी बनाया और लगा चोदने करीब 5 मिनट तक लगातार ठोकता रहा और प्यूरी ताकत के साथ लण्ड को पेलते हुए स्खलित हो गया ! जब पूरी ताकत से लण्ड को पेला तब श्यामा के मुँह से निकला ''उई माँ मर गई'' और पेट की तरफ लेट गई ! मैं लण्ड पेले हुए उसके उनपर पड़ा रहा,वीर्य बहकर बाहर निकलने लगा तो ओ बोली ''अब उठिये न'' तब मैं उठ गया तो ओ बैठ गई ! जैसे ही ओ बैठी गाढा गाढा वीर्य निकलकर बिस्तर में फ़ैल गया ! तो पेटीकोट उठाया और अपनी चूत से बहते हुए वीर्य को साफ़ किया ! बिस्तर में वीर्य फैलकर गद्दे की रुई सोखने लगी तो नंगी ही उठी और चादर का एक कोना पकड़कर वीर्य को पोछने लगी और मेरी तरफ देखकर बोली ''कब से खाली नहीं किया था'' और मुस्कुराने लगी ! मैं कुछ नहीं बोला बल्कि उसकी चूचियों को खिलाने लगा ! ओ चादर साफ़ कर उठी और पेटीकोट पहनने लगी तो मैंने रोक दिया और बोला ''आज ऐसे ही मेरे साथ सो जाओ न'' तो बोली ''पिसाब लगी हबय'' तब मैंने कहा ''ऐसे ही चली जाओ न'' तो सर्माते हुए बोली ''धत्त बेसरम कही के'' तब मैंने कहा ''अच्छा ठीक है,साडी ओढ़कर चली जाओ'' तो उठी और दरवाजा खोला दरवाजे में डला हुआ चादर उठाया और उसे ओढ़कर बाहर निकल गई और, मैं दरबाजे के पास खड़ा होकर उसे देखने लगा ! ओ आँगन के एक किनारे जाकर पेसाब करने लगी ! उसके पेसाब करने की सी ईईईई ईईईई की अबाज साफ़ साफ़ सुनाई दे रही थी ! ओ पेसाब करके आ गई तो मैं भी जाने लगा तो बोली ''यही कर लो कोई देख न ले'' तब मैंने कहा ''रात में कौन देखेगा'' तो बोली ''कही हेमंत न बाहर आ जाए'' तब मैंने कहा ''नहीं मैं जल्दी से हूँ करके'' तो बोली ''ठीक है आप जाओ मैंने हेमन्त को देखकर आती हूँ'' और मेरे साथ ही निकलकर अपने पड़के के कमरे में चली गई ! मैं पेसाब करके कमरे के अंदर आ गया पर ओ 3 मिनट तक कमरे आई तब मैं उसके लड़के के कमरे में गया तो देखा की ओ लड़के के सिर पर हाथ घुमा रही थी मुझे देखते ही जाने का इसारा किया तो मैं चला आया ! करीब 10 मिनट बाद आई और लाइट बंद करके मेरे पास लेट गई ! मैंने पूछा ''क्या हुआ हेमन्त को'' तो बोली ''जग गया था इसी लिए उसे फिर से सुला रही थी'' ! दोनों नंगे ही बिस्तर पर लेट गए ओ चुदाई से खूब संतुष्ठ थी, पर बिना कंडोम लगाए चुदवाने से डरी हुई थी ! मैंने कहा ''चिंता नहीं करों,समय पर महीना नहीं आया तो मैं दवाई लेकर दे दूंगा'' ओ संतुष होकर मेरे सीने पर बड़े बड़े काले काले बालों पर उंगलियां घुमाते हुए बाते करने लगी ! मैंने पूछा ''भौजी आप कल रात में मिली दिन में परिचय हुआ और आज रात में मैं आपके साथ आपके बिस्तर में हूँ,आपने ऐसा देखा मुझमे'' तो बोली ''कुंवर जी आपने एक तो मेरी इज्जत बचाई, दुसरा आप जैसे गबरू,सुन्दर जबान के साथ कोई भी ओरत मर मिठे'' मैंने बोला ''मैं इतना अच्छा लगा आपको'' तो बोली ''आप बहुत स्मार्ट है'' फिर मैंने पूछा ''आप की उम्र इतनी कम है, आप इतनी खूबसूरत हो फिर भी आप मंगलू दादा जैसे अधेड़ के साथ क्यों आ गई'' तो इस सवाल पर चुप हो गई जब बार बार पूछा तो बोली ''क्या करती कुंवर, मेरे जिश्म से तो कई ने खेला पर कोई अपनाने को तैयार नहीं था, इनके पास 10 बीघे जमीन है मेरे हेमंत का भविष्य बन जाएगा,इस लिए इनके साथ आ गई'' तब मैंने पूछा ''मंगलू दादा आपकी भूख को सांत कर पाते है क्या'' तो बोली '' बिल्कुल भी नहीं,10 महीने में दस बार भी नहीं किया और जब जब किया तो मुझे अधूरा ही छोड़कर सो गए'' तब मैंने फिर पूछा ''कब तक ऐसे तड़पोगी दादा के साथ'' तो बोली ''अब तो आप मिल गए हो न अब नहीं तड़पूंगी'' तब मैंने कहा ''मैं तो बाहर रहता हूँ'' तो बोली ''आप बीच बीच में आ जाइयेगा,वैसे भी आप मेरी जिश्म की आग एक बार बुझा देंगे तो मैं 1 -2 माह निकाल लुंगी'' तब मैंने कहा ''मैं हर महीने आऊंगा तो मिलोगी क्या'' तो बोली ''मौका मिला तो आपसे जरूर मिलूंगी'' ऐसी ही बहुत से बाते करते करते श्यामा सो गई ! मैं भी श्यामा की चूचियों को सहलाते सहलाते से चिपक कर सो गया ! विगोरा फ़ोर्स और विगोरा 100 का सर 4 घंटे तक रहता है ! रात में नींद खुल गई तो मोबाइल में देखा 3 बजे है लण्ड में खूब तनाव पैदा हो गया ! धीरे से मोबाइल की लाइट जलाया और श्यामा के नंगे वदन को देखने लगा तो मन में शैतान जागा क्यों न इसका वीडियो बना लूँ, कभी अकड़ी या नहीं चुदवाने को तैयार हुई तो इस वीडियो से ब्लैकमेल कर सकूँगा ये सोचकर चुपचाप उठा और लाइट जलाया और नंगी श्यामा का पूरा वीडियो बना लिया ! उसकी चूचियों को,चूत को सहलाते हुए पूरी रिकार्डिंग कर लिया और मोबाइल रखकर श्यामा की चूचियों के चूसने लगा,चूत में ऊँगली घुमाने लगा तो जग गई और मेरी तरफ देखते हुए बोली ''नींद नहीं आ रही है क्या'' तो मैंने कहा ''नहीं आ रही है'' तो अपनी दोनों बाहों को फैलाया और चिपका लिया तो मैंने उसके होठो को चूमने लगा,फिर होठो को चूसने लगा ------------ क्रमश





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